Tuesday, 23 August 2011

AHIMSA PARTY: एक जरुरी सुचना सभी अहिंसा वादी / जैन / पशु प्रेमी ...

AHIMSA PARTY: एक जरुरी सुचना सभी अहिंसा वादी / जैन / पशु प्रेमी
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: एक जरुरी सुचना सभी अहिंसा वादी / जैन / पशु प्रेमी क्या हम इतना तो कर सकते है : आप के सहर में शुक्रवार को कत्लखाने या मांस बिक्री की दुकान ...
एक जरुरी सुचना सभी अहिंसा वादी / जैन / पशु प्रेमी
क्या हम इतना तो कर सकते है :
आप के सहर में शुक्रवार को कत्लखाने या मांस बिक्री की दुकान खुली हो तो तुरंत प्रशाशन को सूचित करे
कृपया आप अपने अधिकारों का प्रयोग कीजिये, प्रत्येक नगरपालिका इन निर्धारित दिनों में नगरपालिका अधिनियम 1951 की धारा 256 के अधीन मांस विक्रेता को स्वयातासशन विभाग के अंतर्गत अपने आदेश F-10LS /74 /4156 दिनांक 29 -09 -1998 के अनुपालन में प्रत्येक शुक्रवार या दुकानदार द्वारा दर्शाए छुट्टी के दिन को कत्लखाने या मांस बिक्री की दुकानें बंद रखनी जरुरी है |
इस के अलावा कुछ मुख्य त्योहार जैसे कि गणेश चतुर्थी, कृष्ण जन्माष्टमी, प्रयुषण महापर्व, कृषी पंचमी, अनंत चौदस, १५ अगस्त, २६ जनवरी को अपने सहर के कत्लखाने व मांसाहार कि दुकान बंद रखे यदि खुली हो तो बंद कराये या प्रशाशन को सूचित करे कत्लखाने व मांसाहार की दुकानों पर निम्नलिखित दर्शित होना जरुरी है एवं अवश्यक है :
१. लाइसेन्स नंबर
२. शुक्रवार या साप्ताहिक घोषित छुट्टी नोटिस बोर्ड पर होनी चाहिए
३. चिकोदर (कोई पर्दा या चिक) लगा होना चाहिए जिससे कि प्रत्येक गुजरने वाले के मन को ठेस न पहुचें
नोट :
श्वेताम्बर के पर्युषण पर्व के दौरान एवं दिगम्बर के दसलक्षण के दौरान भी पशु वधशाला, व मांस की बिक्री बंद का सुप्रीम कोर्ट का आदेश है ... जिस के लिए आप को इतना करना जरुरी है ..
मेरे इस प्रयत्न में कोई भूल हो गई हो तो मिच्छामी दुक्कदम
जय जिनेन्द्र देव की



VERY IMPORTANT NOTES TO ALL AHIMSA WADI/ JAINS/ ANIMAL LOVERS
KYA HUM ITNAA TO KAR HI SAKTE HE::_
aap ke saher me shukravaar ko kathalkhane va mans bikri ki dukane khuli ho to turant prashan ko suchit kare
krupya aap apne adhikaro ka prayog kijiye,pratyek nagarpalika in nidharit dinon me nagarpalika adhiniyam 1951 ki dhara 256 ke adheen maans vikreta ko swayatasashan vibag ke antargath apne aadesh F-...10LS/74/4156.DATED 29-9-1998 KE anupalan me pratyek shukravar ye dukandar dwara darshaye chutti ka din ko khatalkhane va maans bikri ki dukane band raakhni jaruri hai
is ke alava kuch mukhya tyohar jaise ki GANESH CHATURTHI ,KRISHNASTHMI, PARYUSHAN MAHA PARV, KRUSHI PANCHMI,ANANT CHOUDASI, 15 AUG ,26 JAN KO apne saher ke kathalkhane va manshaahar ki dukan band rakhaye yadi khuli ho to band karaye ya prashasan ko suchit kare

KAHALKHANE VA MANSHAAHAR KI DUKANO PAR NIMN VASTU DAARSHIT HONA JARURI HAI AVEM AVASYAK HAI..
1.LICENSE NUMBER.
2.FRIDAY YA DECLARED HOLIDAY OF WEEK KA NOTICE BOARD DISPLAY
3. CHIKDOR LAGA HONA CHAHIYE JISSE PRATYEK GUJARNE WALE KO MAN KO DHES NA PAHUNCHE

NOTE :-
SWETAMBAR KE PARYUSHAN PARV KE DAURAN AVEM DIGAMBER KE PARYUSHAN KE DAURAAN BHI PASHUVAD SHALA ,VA MANS KI BIKRI BAND KA SUPREME COURT KA AADESH HAI..JIS KE LIYE AAP KO ITNA KARNA JARURI HAI..

MERE IS PRAYATN ME KOI BHUL HO GAYE HO TO MICHAMI DUKADAM
JAI JINENDRA


Sunday, 21 August 2011

good points follow to be in life


‎1.Try not to become a man of success but a man of value
2.The talent of success is nothing more than doing what you can do, well.
3.Success is the good fortune that comes from aspiration, desperation, perspiration and inspiration.
4.Success does not consist in never making blunders, but in never making the same one a second time.
5.The difference between a successful person and others is not a lack of strength, not a lack of knowledge, but rather a lack in will.
6.We are all motivated by a keen desire for praise, and the better a man is, the more he is inspired to glory.
7.Fortune favors the brave.
8.Great spirits have always encountered violent opposition from mediocre minds.
9   .Knowing is not enough; we must apply.
    .Willing is not enough; we must do.
10.We are still masters of our fate.
     We are still captains of our souls.
11.Nothing great was ever achieved without enthusiasm.
1.Fortune favors the brave.
2.Great spirits have always encountered violent opposition from mediocre minds.
3.Knowing is not enough; we must apply.
.Willing is not enough; we must do.
4.We are still masters of our fate.
We are still captains of our souls.
5.Nothing great was ever achieved without enthusiasm.

Thursday, 18 August 2011

Lord Mahavir Quotes

Lord Mahavir Quotes


  • The greatest mistake of a soul is non-recognition of its real self and can only be corrected by recognizing itself.

  • Silence and Self-control is non-violence.

  • Every soul is independent. None depends on another

  • There is no separate existence of God. Everybody can attain God-hood by making supreme efforts in the right direction.

  • Every soul is in itself absolutely omniscient and blissful. The bliss does not come from outside.

  • Have compassion towards all living beings. Hatred leads destruction.

  • Respect for all living beings is non‑violence.

  • All human beings are miserable due to their own faults, and they themselves can be happy by correcting these faults.

  • Non-violence is the highest religion

  • A man is seated on top of a tree in the midst of a burning forest. He sees all living beings perish. But he doesn't realize that the same fate is soon to overtake him also. That man is fool.

  • Fight with yourself, why fight with external foes? He, who conquers himself through himself, will obtain happiness.

  • Wednesday, 17 August 2011

    तपस्या का फल

    तपस्या का फल
    नवकारसी - १०० वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    पोरसी - १००० वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    २ पोरसी - १ लाख वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    एकासन - दस लाख वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    नीवी - एक करोड़ वर्ष के अशुभ क्षय |
    एकलठाणा - दस करोड़ वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    आयम्बिल - सौ करोड़ वर्ष के अशुभ कर्म क्षय |
    पूर्ण पौषध - २७ अरब, ७७ करोड़, ७७ लाख, ७७ हजार ७७७ पल्योपम से कुछ अधिक अशुभ कर्मों का क्षय होता है |
    नोट - तपस्या निर्जरा के लिए ही करें

    WE ALL JAINS ARE ONE


    हम नहीं दिगंबर श्वेताम्बर तेरापंथी स्थानक वासी
    सब एक पंथ के अनुयायी ,सब एक देव के विश्वासी
    हम जैनी अपना धर्म जैन , इतना ही परिचय केवल हो
    हम यही कामना करते है ,ऐसा आने वाला कल हो...........

    TRUST

    "3_दोस्तों की कहानी
    1 ज्ञान
    2 धन
    3 विस्वास
    तीनो बहुत अछे दोस्त थे तीनो में प्यार भी बहुत था .
    ......एक ऐसा वक़्त आया को तीनो को जुदा होना पड़ा ,
    तीनो ने एक दुसरे से सवाल किये की कौन कहा जयेगा ..
    ज्ञान बोला :में मंदिर , मस्जिद ,Church ,गुरूद्वारे और विद्यालय जाऊंगा .
    धन ने कहा :में महल और अमीरों के पास जाऊंगा लेकिन
    विस्वास चुप था दोनों ने वजह पूछी तोह विस्वास ने ठंडी आह भर के कहा
    में एक बार चला गया तोह फिर कभी वापस नही आऊंगा

    ITS TIME TO DO SOMETHING FOR OUR MOTHER LAND

    280 लाख करोड़ का सवाल है ...
    भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहा "* ये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का . स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा है . ये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है .

    या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते है . या यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी... भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है .

    ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते है . ये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना हो . यानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं है . जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को

    लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी है .

    इस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया है . अंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटा .

    मगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रस्टाचार ने 280 लाख करोड़ लूटा है . एक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ है . यानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़ , या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है .

    भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लोन की कोई दरकार नहीं है . सोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है .

    हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का पूर्ण अधिकार है . हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला , २ जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला ... और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........

    आप लोग जोक्स फॉरवर्ड करते ही हो .
    इसे भी इतना फॉरवर्ड करो की पूरा भारत इसे पढ़े ... और एक आन्दोलन बन ज

    ।। भूल ।।


    जो कभी भूल न करे. उसे भगवान कहते हैं,
    जो भूल कर भूल जाए उसे नादान कहते हैं।
    जो भूल कर मुस्कराए-उसे शैतान कहते हैं।
    जो भूल कर कुछ सीख जाए उसे इन्सान कहते हैं।
    भूल होना सहज है, परन्तु उस भूल को सुधार देना,
    इसी में इन्सानियत मानवता है। भूतकाल से कुछ सीखों
    और भविष्य को सुधारो-यही बुद्धिमत्ता का लक्षण है।

    Saturday, 13 August 2011

    Subject: GOD is one - Amazing..!



    Do you agree that we have
    26 alphabets in English,
    as given below
    A B C D E F G H I J K L M N O
    P Q R
    1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12
    13 14 15 16 17 18
    S T U V W X Y Z
    19 20 21 22 23 24 25 26
    With each alphabet getting
    a number, in chronological
    order, as above, study the
    following, and bring down
    the total to a single digit
    and see the result yourself
    Hindu
    S h r e e K r i s h n a
    19+8+18+5+5+11+
    18+9+19+8+14+1= 135=9
    M u s l i m
    M o h a m m e d
    13+15+8+1+13+13
    +5+4=72=9
    Jain
    M a h a v i r
    13+1+8+1+22+9+1
    8=72=9
    Sikh
    G u r u N a n a k
    7+21+18+21+14+1
    +14+1+11=108=9
    9 Parsi
    Z a r a t h u s t r a
    26+1+18+1+20+8+
    21+19+20+18+1=1 53=
    Buddhist
    G a u t a m
    7+1+21+20+1+13= 63=9
    Christian
    E s a M e s s i a h
    5+19+1+13+5+19+
    19+9+1+8=99=18= 9
    Each one ends with
    number 9
    THAT IS NATURE'S CREATION
    TO SHOW THAT GOD IS ONE.
    BUT MAN FIGHTS WITH MAN
    ON THE BASIS OF RELIGION.

    Wednesday, 3 August 2011

    patni naam ki prani

    यदि आप शादीशुदा हैं तो आपको अवश्य ही पता होगा कि पत्नी नाम की प्राणी विलक्षण प्रतिभा से युक्त होती है। पत्नी के पास पति की एक एक बात का लेखा-जोखा रहता है। पत्नी अपने पति की एक-एक बात, एक-एक आदत को अच्छी तरह से जानती है। किस दिन आपकी सेलरी मिलती है, कब ओव्हरटाइम का पेमेन्ट होता है, कब आपको बोनस मिलता है जैसी बातें तो आपकी पत्नी अच्छी प्रकार से जानती ही हैं पर उन्हें इनके अलावा इसका भी ज्ञान रहता है कि आप कब पीकर आये हैं, कब झूठ बोल रहे हैं आदि-आदि इत्यादि। पति अपने बारे में जितना नहीं जानता उससे अधिक पत्नी जानती है उसके विषय में। मजाल है कि पति की कोई बात पत्नी से छुप जाये! कहने का लब्बोलुआब है कि बहुत विचित्र जीव होती है ये पत्नी नाम की प्राणी।

    आपके रग-रग से परिचित होने के लिए आपकी पत्नी को बहुत अधिक समय की आवश्यकता नहीं होती, शादी होने के चंद दिनों के भीतर ही वह आपके बारे में सब कुछ जान लेती है। इस बात की एक आपबीती उदाहरण प्रस्तुत कर रहा हूँ।

    शादी के पहले ऑफिस जाते समय हमारी माता जी हमारा टिफिन तैयार करती थीं। हमारी खुराक से अधिक खाना रहता था उसमें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि प्रायः प्रत्येक ऑफिस में एक न एक सहकर्मी जरूर ऐसा होता है जो कभी भी अपना टिफिन नहीं लाता पर खायेगा जरूर दूसरों की टिफिन से। हमारे टिफिन का अतिरिक्त खाना हमारे एक ऐसे ही सहयोगी के काम आता था। शादी होने के बाद कुछ दिनों तक तो माता जी ही टिफिन तैयार करती रहीं फिर धीरे से इस कार्यभार को हमारी श्रीमती जी ने अपने हाथों में ले लिया। लंच समय में जब हमने टिफिन खोला तो देखा छः पराठों की जगह चार ही पराठे और चाँवल भी रोज की अपेक्षा आधा। इधर हमारे टिफिनविहीन मित्र भी तत्काल आ धमके। खाना खाने की हमारी गति बहुत धीमी है। हम जब तक एक पराठा खतम करते, मित्र ने बाकी तीनों पराठे उदरस्थ कर लिये। चाँवल का भी अधिकतम हिस्सा उनके ही उदर में समा गया। हम तो रह गये भूखे।

    ऑफिस से आने पर श्रीमती जी से जब कहा कि खाना कम क्यों रखा था तो जवाब मिला, “कम? कम कहाँ था? क्या मैं नहीं जानती कि आप कितना खाते हैं? मैंने तो अपने हिसाब से कुछ अधिक ही खाना रखा था। लगता है कि आपका खाना दूसरे लोग खा जाते हैं।”
    हमने कहा, “हाँ भइ, अब कोई एकाध रोटी खा ले तो क्या फर्क पड़ता है? मना करते अच्छा भी तो नहीं लगता।”

    वे बोलीं, “क्यों अच्छा नहीं लगता? क्या आपके मित्रों को तनखा नहीं मिलती? वो अपना खाना खुद क्यों नहीं लाते? अब से आपका इस प्रकार से रोज रोज दूसरों को खाना खिलाना बिल्कुल नहीं चलेगा।”

    बताइए अब हम क्या कहते? इधर ऑफिस में हमारे मित्र को तो आदत लगी हुई थी रोज हमारे साथ खाने की, उन्हें क्या पता कि अब हमें भूखे मरना पड़ता है। अन्ततः दो-तीन दिन बाद कह ही दिया, “यार, तुम अपना खाना लाया करो नहीं तो नजदीक के भोजनालय में चला जाया करो।”
    इस प्रकार से श्रीमती जी ने हमसे वह कहलवा लिया जो कि शादी के पहले हम कभी भी नहीं कह सकते थे।
    शुरू-शुरू में तो हम त्रस्त रहते थे उनके हमारे बारे में सबकुछ जानने की वजह से। हम समझते थे कि पति के लिये पत्नी “साँप के मुँह में छुछूंदर” ही होती है जिसे न तो निगलते बनता है और न ही उगलते। पर बाद में धीरे-धीरे इस बात की समझ भी हमें आ ही गई कि पत्नियाँ जहाँ एक तरफ पतियों को अपनी मुट्ठी में रखने का भरपूर प्रयास करती हैं वहीं दूसरी तरफ पति पर आये किसी भी विपत्ति को दूर करने के लिये जी जान तक लगा देती हैं।

    जीवन में पति-पत्नी के बीच बहुत सारे तकरार, नोक-झोंक चलते हैं किन्तु यह भी सत्य है कि वे दोनों ही एक-दूसरे के पूरक भी हैं। एक के बिना दूसरे का जीवन अधूरा है। पत्नी पति की प्रेरणा होती है। अनेक उदाहरण मिल जायेंगे इसके और सबसे बड़ा उदाहरण तो तुलसीदास जी का है। यदि रत्नावली ने यह न कहा होता किः

    “लाज न आवत आपको, दौरे आयहु साथ।
    धिक् धिक् ऐसे प्रेम को, कहा कहौं मैं नाथ॥
    अस्थिचर्ममय देह यह, ता पर ऐसी प्रीति।
    तिसु आधो रघुबीरपद, तो न होति भवभीति॥”

    तो आज हम रामचरितमानस से ही वंचित रहते।
    श्री गोपाल प्रसाद व्यास जी ने सही ही लिखा हैः

    यदि ईश्वर में विश्वास न हो,
    उससे कुछ फल की आस न हो,
    तो अरे नास्तिको! घर बैठे,
    साकार ब्रह्‌म को पहचानो!
    पत्नी को परमेश्वर मानो!

    तो साहब, हँसी-ठिठोली, हास-परिहास, घात-प्रतिघात, ब्याज-स्तुति, ब्याज-निंदा तो चलते ही रहते हैं। ये सब न हों तो जीवन में रस ही क्या रह जाता है?

    एक बात तो माननी ही पड़ेगी, पत्नी चाहे पति को गुलाम बनाये या चाहे पति की गुलामी करे, होती वह सच्चा साथी है। जीवन के सारे सुख-दुःख में साथ निभाने वाली वही होती है!

    ‘अवधिया’ या संसार में, मतलब के सब यार।
    पत्नी ही बस साथ दे, बाकी रिश्ते बेकार॥

    चलते-चलते
    पति, “तुम मेरे रिश्तेदारों की बनिस्बत अपने रिश्तेदारों को ज्यादा प्यार करती हो।”
    पत्नी, “गलत! मैं अपनी सास से अधिक तुम्हारी सास को प्यार करती हूँ।”

    SONA Ro BAJOTIO

    सोना रो बाजोटियो ने, मोतीडा सु मढीयो, थे तो हो त्रिशला रा जाया, ओ महावीरजी थोने पालणीये पोढावुं,  पालणीये पोढावु, ओ थोने हालरीये हुलरावं, सि...