• जैन धर्म - जन जन का धर्म
जैन धर्म जन धर्म है. परम वैज्ञानिक धर्म है.
जैन धर्म प्रयोगिक धर्म है .
सर्वज्ञ भगवान द्वारा प्रणीत शाश्वत धर्म है.
** जैन धर्म मे जीव -जगत, लोक –अलोक की सुक्षम व्याख्या है.
*** जैन धर्म के सभी तीर्थन्करो ने अतुलनीय संपदा को त्याग कर सयम का मार्ग अपनाया.
जैन धर्म के सिद्धांत आत्म विकास के सूत्र ही नही ,युगीन समस्याओ के समाधान के सूत्र है.
अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह समाज विकास के महान सूत्र है.
अहिंसक क्रांति से महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, वर्तमान मे अण्णा हजारे जी युग को नई दिशा दे रहे है.
आपसी बातचीत से समस्याओ का समाधान अनेकांत का प्रयोग है.
वारेन बफेट,आदि उधयोगपतियो द्वारा अपनी संपत्ति के 90 प्रतिशत से ज्यादा का दान अपरिग्रह का महान प्रयोग है.
**** जैन धर्म व्यक्ति का नही गुणो का उपासक है, नमस्कार महामंत्र मे गुणो की उपासना है.
जैन धर्म मानव मात्र का धर्म है. सभी तीर्थकर क्षत्रीय, गणधर गौतम ब्राह्मण, हरीकेशी मुनि चांडाळ कुल के थे.
जैन धर्म आत्म विकास का धर्म है, बिंदु से सिंधु, भक्त से भगवान की यात्रा का मार्ग.
* * * * *आये भगवान महावीर के संदेश को जन जन तक पहुचाये.................
जैन धर्म जन धर्म है. परम वैज्ञानिक धर्म है.
जैन धर्म प्रयोगिक धर्म है .
सर्वज्ञ भगवान द्वारा प्रणीत शाश्वत धर्म है.
** जैन धर्म मे जीव -जगत, लोक –अलोक की सुक्षम व्याख्या है.
*** जैन धर्म के सभी तीर्थन्करो ने अतुलनीय संपदा को त्याग कर सयम का मार्ग अपनाया.
जैन धर्म के सिद्धांत आत्म विकास के सूत्र ही नही ,युगीन समस्याओ के समाधान के सूत्र है.
अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह समाज विकास के महान सूत्र है.
अहिंसक क्रांति से महात्मा गांधी, नेल्सन मंडेला, वर्तमान मे अण्णा हजारे जी युग को नई दिशा दे रहे है.
आपसी बातचीत से समस्याओ का समाधान अनेकांत का प्रयोग है.
वारेन बफेट,आदि उधयोगपतियो द्वारा अपनी संपत्ति के 90 प्रतिशत से ज्यादा का दान अपरिग्रह का महान प्रयोग है.
**** जैन धर्म व्यक्ति का नही गुणो का उपासक है, नमस्कार महामंत्र मे गुणो की उपासना है.
जैन धर्म मानव मात्र का धर्म है. सभी तीर्थकर क्षत्रीय, गणधर गौतम ब्राह्मण, हरीकेशी मुनि चांडाळ कुल के थे.
जैन धर्म आत्म विकास का धर्म है, बिंदु से सिंधु, भक्त से भगवान की यात्रा का मार्ग.
* * * * *आये भगवान महावीर के संदेश को जन जन तक पहुचाये.................