मारी झोपडिये आवो मारा नाथ,
एक वार आवो दादा पुरा होवे काज,
मारी झोपडिये आवो मारा नाथ....
दर्शन बिन मारे मन नही लागे,
अंखियाने दादा मारी निंद नहि आवे,
नहिरे आवो तो दादा, जावे मारा प्राण,
मारी झोपडिये.........
मारी नावडली रा खेवनहारा,
थारे बिना नहि कोई सहारा,
मारी किस्तीने पार लगावो दादा आप
मारी झोपडिये........
दुःखडा तो मारा दादा किनने सुनाउ
शिवपुररा राजा थे हो, थो ने ही ध्याउ
थारी महिमारा मै तो, गुण गाउ आज,
मारी झोपडिये.......
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