तारे द्वारे आवी ने कोई खाली हाथे जाय ना
करुना निधान करुना निधान।।धृ।।
आ दुनियामा कोई नथी रे तुझ सरीखो दातार।
अपरम्पार दया छे थारी थारा हात हजार।
तारी ज्योती पामिने कोई अंधार अट्वायाना।।१।।
शरणे आवेलानो साचो तू छे राखनहार
डगमगती जीवन नैया नो तू छे तारणहार
तारे पंथे हजारो कधिये भवभ्रमना अट्वायना।।२।।
खुटे नहीं कदापी एवो थारो प्रेम खजानों
मुक्ती नो मार्ग बतलावे एवो थारो पंथ मजानो
थारे शरणे जे कोई आवे रंग पर रही जाय ना।।३।।

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